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राजस्थान के 5 पंचपीर में हड़बूजी सांखला — CET/RAS PYQ के साथ (2026 Free Notes)

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
15 अगस्त 2026
अंतिम समीक्षा: 14 सितंबर 2026
9 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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राजस्थान के 5 पंचपीर में हड़बूजी सांखला — CET/RAS PYQ के साथ (2026 Free Notes)

सुयोग AI गुरु

नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

🔷 त्वरित उत्तर बॉक्स (Quick Answer Box)

बिंदुविवरण
पूरा नामहड़बूजी सांखला (हड़बू जी)
उपनामभविष्यदृष्टा, शकुनशास्त्र के ज्ञाता, वचन सिद्ध पुरुष
जन्म स्थानभूंडेल/भूंडोल गाँव (नागौर)
पितामेहराज (मेहाजी) सांखला, भूंडेल के जागीरदार — कुछ स्रोतों में "महाराज सांखला" या "गोपालदेव सांखला" भी उल्लेखित
गोत्रसांखला (पंवार/परमार राजपूतों की शाखा)
गुरुयोगी बालीनाथ
समकालीन शासकराव जोधा, मारवाड़ (जोधपुर संस्थापक)
पारिवारिक संबंधबाबा रामदेवजी के मौसेरे भाई
मुख्य पूजा स्थलबेंगटी गाँव, फलौदी
मंदिर निर्मातामहाराजा अजीतसिंह, जोधपुर (सन् 1721 ई. / वि.सं. 1778)
मेला तिथिभाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी
पूजा प्रतीकलकड़ी की गाड़ी (हड़बू जी की गाड़ी) — राजस्थान में गाड़ी रूप में पूजे जाने वाले एकमात्र लोकदेवता
प्रमुख ग्रंथ"सांखला हडबू का हाल" (मुंहता नैणसी द्वारा उल्लेखित)
पुजारीसांखला राजपूत

🔷 परीक्षा हेतु महत्व (Syllabus Weight)

हड़बूजी सांखला RPSC, RAS, RSMSSB (पटवारी, ग्राम सेवक), REET एवं SI भर्ती की राजस्थान कला-संस्कृति यूनिट में "लोक देवता एवं लोक संत" उपखंड से नियमित रूप से पूछे जाते हैं। यह विषय पंच पीर (रामदेवजी, पाबूजी, गोगाजी, मेहाजी, हड़बूजी) की पूरी सूची, जन्मस्थान-मंदिर-मेला मैचिंग टेबल, और नागौर जिले से जुड़े संतों (तेजाजी, हड़बूजी, कल्लाजी, जांभोजी, दरियावजी, मीराबाई) के भ्रामक प्रश्नों के रूप में बार-बार दोहराया गया है। पिछले पेपरों में जन्मस्थान/मंदिर स्थान की अदला-बदली (matching) और "पंच पीर में कौन शामिल नहीं है" जैसे प्रश्न सामान्य रहे हैं। इस टॉपिक को मध्यम-से-उच्च वेटेज दिया जा सकता है, विशेषकर जब प्रश्नपत्र में एक से अधिक लोकदेवताओं की तुलनात्मक जानकारी माँगी जाती है।

🔷 परिचय

राजस्थान की लोक आस्था में जहाँ रामदेवजी, पाबूजी और गोगाजी सर्वाधिक चर्चित नाम हैं, वहीं हड़बूजी सांखला को मारवाड़ क्षेत्र में समान श्रद्धा प्राप्त है। वे न केवल एक योगी-संत थे बल्कि शकुनशास्त्र (भविष्यवाणी विद्या) के मर्मज्ञ के रूप में भी प्रसिद्ध हुए। जनश्रुति है कि उन्हें भविष्य देखने की दिव्य शक्ति प्राप्त थी, इसीलिए उन्हें "भविष्यदृष्टा" कहा जाता है। हड़बूजी की गणना राजस्थान के उन पाँच प्रमुख लोकदेवताओं (पंच पीर) में होती है, जिनकी सर्वाधिक व्यापक स्तर पर पूजा-अर्चना होती है — रामदेवजी, पाबूजी, गोगाजी, मेहाजी मांगलिया और हड़बूजी सांखला।

हड़बूजी का जीवन त्याग, गोरक्षा और लोकसेवा का प्रतीक माना जाता है। एक क्षत्रिय राजपुत्र होकर भी उन्होंने अस्त्र-शस्त्र त्याग कर योग-साधना का मार्ग अपनाया, और अपना संपूर्ण जीवन गौ-सेवा तथा जनकल्याण में समर्पित कर दिया।

🔷 जन्म एवं प्रारंभिक जीवन

घटनाविवरण/तिथि
जन्म स्थानभूंडेल (भूंडोल/भडेल) गाँव, नागौर
जन्म तिथि (एक स्रोत अनुसार)भाद्रपद कृष्ण षष्ठी, विक्रम संवत 1448 (लगभग 1391 ई.)
पितामेहराज सांखला, भूंडेल गाँव के जागीरदार
पैतृक स्थिति त्यागपिता की मृत्यु के पश्चात् विक्रम संवत 1462 (लगभग 1405 ई.) में भूंडेल छोड़ा
समकालीन शासकराव जोधा (मारवाड़/जोधपुर, शासनकाल लगभग 1438–1489 ई.)

पिता की मृत्यु के बाद हड़बूजी ने अपना पैतृक गाँव भूंडेल छोड़ दिया और फलौदी क्षेत्र की ओर प्रस्थान किया। यहीं से उनके जीवन का वह अध्याय शुरू होता है, जो उन्हें एक जागीरदार-पुत्र से लोकदेवता के पद तक ले गया।

🔷 सांखला गोत्र की उत्पत्ति

"सांखला" नाम की उत्पत्ति एक रोचक जनश्रुति से जुड़ी है। यह पंवार (परमार) राजपूतों की एक शाखा है। प्रचलित कथा के अनुसार किराडू के परमार शासक धरणीवराह के वंशज बाघ/वैरसी को कुलदेवी ने प्रसन्न होकर एक पवित्र शंख प्रदान किया था, जिसके पश्चात् उनके वंशज "सांखला" कहलाने लगे।

⚠️ स्रोत भिन्नता: इस कथा में देवी का नाम अलग-अलग स्रोतों में भिन्न मिलता है — वंशावली अभिलेखों में सच्चियाय माता (ओसियां) का उल्लेख है, जबकि हड़बूजी-केंद्रित लोक-स्रोतों में भाटियाणी माता का नाम आता है। इसी प्रकार शंख प्राप्तकर्ता का नाम भी कहीं "वैरसी/बैरसी" तो कहीं "वीरम" मिलता है। परीक्षा उत्तर देते समय RPSC के आधिकारिक पाठ्यक्रम व राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल की सामग्री से इसे अवश्य क्रॉस-चेक करें।

🔷 रामदेवजी से संबंध एवं योगी बालीनाथ से दीक्षा

हड़बूजी सांखला और बाबा रामदेवजी के बीच घनिष्ठ पारिवारिक व आध्यात्मिक संबंध थे — दोनों को मौसेरे भाई बताया जाता है, यद्यपि आयु में हड़बूजी रामदेवजी से बड़े थे। मुंहता नैणसी के अनुसार वे "गुरु-भाई" भी थे। रामदेवजी की प्रेरणा से ही हड़बूजी ने योगी बालीनाथ से दीक्षा ग्रहण की और अपने अस्त्र-शस्त्र त्याग दिए। गुरु बालीनाथ के आदेशानुसार उन्होंने चाखू गाँव में कठोर तपस्या की और साथ ही लोककल्याण के कार्यों में स्वयं को समर्पित किया।

दीक्षा के पश्चात् हड़बूजी एक योद्धा से योग-साधक और चमत्कारिक संत के रूप में स्थापित हुए। रामदेवजी के समाज-सुधार आंदोलन को आगे बढ़ाने में उन्होंने आजीवन पूर्ण निष्ठा से कार्य किया, यही कारण है कि लोक-मान्यता में उनकी गणना रामदेवजी (रामसापीर) के साथ राजस्थान के प्रमुख हिन्दू "पीरों" में की जाती है।

🔷 मुख्य पूजा स्थल — बेंगटी हड़बूजी मंदिर

बिंदुविवरण
स्थानबेंगटी गाँव, फलौदी तहसील
वर्तमान जिलाफलौदी (2023 के नए जिला पुनर्गठन से पूर्व यह जोधपुर जिले में था)
निर्माणकर्तामहाराजा अजीतसिंह, जोधपुर
निर्माण वर्षसन् 1721 ई. (विक्रम संवत 1778)
पुजारीसांखला राजपूत (परंपरागत रूप से नियुक्त)
पूजा स्वरूपहड़बूजी की "गाड़ी" (लकड़ी की बैलगाड़ी) की पूजा

पूजा की विशिष्ट परंपरा: मान्यता है कि हड़बूजी अपंग/लाचार गायों के लिए दूर-दूर से गाड़ी में घास भरकर लाते थे। इसी स्मृति में मंदिर में उनकी लकड़ी की गाड़ी स्थापित है, और मनौती पूर्ण होने पर श्रद्धालु इसी गाड़ी की पूजा करते हैं। राजस्थान में यह एकमात्र लोकदेवता हैं जिनकी पूजा गाड़ी के प्रतीक रूप में की जाती है — यह बिंदु परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

🔷 मेला (वार्षिक उत्सव)

हड़बूजी की कर्मस्थली बेंगटी में प्रतिवर्ष भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी को मेला आयोजित होता है। यह मेला उनके गौ-रक्षा एवं लोकसेवा के जीवन-दर्शन की स्मृति में मनाया जाता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु धोक (श्रद्धांजलि) अर्पित करने पहुँचते हैं।

🔷 पंच पीर तुलनात्मक तालिका

राजस्थान के "पंच पीर" कहलाने वाले पाँचों लोकदेवताओं की तुलनात्मक जानकारी नीचे दी गई है — यह तालिका मैचिंग/तुलनात्मक प्रश्नों के लिए विशेष उपयोगी है:

लोकदेवताजन्म स्थानमुख्य मंदिर/स्थानगुरुविशेष प्रतीक
रामदेवजीउंडूकास्थान/शिव (पोकरण के निकट)रामदेवरा (रुणिचा), जैसलमेरबालीनाथ (परंपरा भिन्न)पगल्या (पदचिन्ह) पूजा, कामड़िया पंथ
पाबूजीकोलू, फलौदीकोलूमंड, फलौदीऊँट रक्षक देवता, "पाबूजी की फड़"
गोगाजीददरेवा, चूरूगोगामेड़ी, हनुमानगढ़गुरु गोरखनाथगोगानवमी मेला, हिन्दू-मुस्लिम दोनों में लोकप्रिय
मेहाजी मांगलियाजोधपुर क्षेत्र(विस्तृत जानकारी हेतु मेहाजी मांगलिया लेख देखें)
हड़बूजी सांखलाभूंडेल, नागौरबेंगटी, फलौदीयोगी बालीनाथगाड़ी पूजा, शकुनशास्त्र ज्ञाता

सत्यापन सलाह: पंच पीर की सूची में कहीं-कहीं क्षेत्रीय परंपरा भेद के कारण करणी माता या तेजाजी का नाम भी जोड़ा जाता मिल सकता है, किंतु मानक परीक्षा-संदर्भ सामग्री में पंच पीर = रामदेवजी, पाबूजी, गोगाजी, मेहाजी व हड़बूजी माना जाता है। उत्तर देने से पूर्व संबंधित परीक्षा के आधिकारिक पाठ्यक्रम से पुष्टि अवश्य करें।

🔷 कालक्रम (Timeline)

समयघटना
वि.सं. 1448 (लगभग 1391 ई.)भूंडेल, नागौर में जन्म
वि.सं. 1462 (लगभग 1405 ई.)पिता मेहराज सांखला की मृत्यु; भूंडेल गाँव त्याग
फलौदी क्षेत्र में आगमन; रामदेवजी के संपर्क में आना
योगी बालीनाथ से दीक्षा; अस्त्र-शस्त्र त्याग; चाखू गाँव में तपस्या
लगभग 1438–1489 ई.राव जोधा (मारवाड़) के समकालीन काल
वि.सं. 1778 (सन् 1721 ई.)महाराजा अजीतसिंह द्वारा बेंगटी में मंदिर निर्माण
वर्तमानप्रतिवर्ष भाद्रपद कृष्ण षष्ठी को बेंगटी मेला

🔷 Exam Trap — सामान्य भ्रम बिंदु

  1. तेजाजी और हड़बूजी में भ्रम: दोनों ही नागौर क्षेत्र से जुड़े हैं, पर तेजाजी परबतसर (डीडवाना-कुचामन) से संबंधित हैं जबकि हड़बूजी का जन्म भूंडेल (नागौर) में हुआ और कर्मभूमि फलौदी है। दोनों को एक-दूसरे का पर्याय न समझें।
  2. पंच पीर की सूची: करणी माता एक देवी हैं, वे "पीर" श्रेणी में सम्मिलित नहीं होतीं; मानक पंच पीर सूची में केवल रामदेवजी, पाबूजी, गोगाजी, मेहाजी व हड़बूजी आते हैं।
  3. जिला भ्रम: बेंगटी मंदिर पहले जोधपुर जिले में गिना जाता था, नए जिला पुनर्गठन (2023) के बाद यह फलौदी जिले में आता है — वर्तमान परीक्षाओं में जिला संबंधी प्रश्न में नवीनतम प्रशासनिक सीमा का ध्यान रखें।
  4. ग्रंथ नाम की वर्तनी: "सांखला हडबू का हाल" व "सांखला हरभू का हाल" — दोनों वर्तनी अलग-अलग स्रोतों में मिलती हैं, मूल ग्रंथ एक ही है, भ्रमित न हों।
  5. पूजा प्रतीक में भ्रम: पाबूजी घोड़े व ऊँट रक्षक देवता के रूप में प्रसिद्ध हैं, जबकि हड़बूजी की विशिष्ट पहचान गाड़ी-पूजा है — यह अंतर मल्टीपल-चॉइस प्रश्नों में बार-बार टेस्ट किया जाता है।
  6. पिता के नाम में भिन्नता: कुछ स्रोत "मेहराज सांखला" तो कुछ "महाराज सांखला" लिखते हैं — यह एक ही व्यक्ति के नाम की वर्तनी भिन्नता है, दो अलग व्यक्ति न समझें।

🔷 याद रखने की ट्रिक (Memory Trick)

पंच पीर याद रखने हेतु: "रा-पा-गो-मे-ह" (रामदेवजी – पाबूजी – गोगाजी – मेहाजी – हड़बूजी)

हड़बूजी की पहचान हेतु: "गाड़ी वाले बाबा, भूंडेल से बेंगटी" — अर्थात् गाड़ी-पूजा वाले एकमात्र लोकदेवता, जन्म भूंडेल (नागौर), कर्मभूमि/मंदिर बेंगटी (फलौदी)।

🔷 शिक्षक की टिप्पणी (Teacher's Commentary)

विद्यार्थी प्रायः हड़बूजी को पाबूजी या तेजाजी के साथ मिला देते हैं क्योंकि तीनों ही मारवाड़-नागौर क्षेत्र की लोक-आस्था से जुड़े हैं। इनसे बचने का सबसे प्रभावी तरीका है — प्रत्येक लोकदेवता के साथ उसकी एक अनूठी पहचान (unique identifier) याद रखना: पाबूजी = ऊँट/घोड़ा रक्षक, तेजाजी = सर्पदंश व नागपंचमी से संबद्ध, हड़बूजी = गाड़ी-पूजा व शकुनशास्त्र। परीक्षा में जब भी "अद्वितीय/एकमात्र" (unique/only) शब्द वाला प्रश्न आए, हड़बूजी की गाड़ी-पूजा वाला तथ्य सबसे पहले दिमाग में आना चाहिए।


🔷 सत्यापन सलाह (Verification Advisory)

इस लेख में उल्लिखित निम्न बिंदुओं पर स्रोतों में भिन्नता पाई गई है, कृपया अंतिम उत्तर देने से पूर्व RPSC के आधिकारिक पाठ्यक्रम व राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल की सामग्री से क्रॉस-वेरिफाई करें:

  • पिता का नाम (मेहराज/महाराज/गोपालदेव सांखला)
  • सांखला गोत्र उत्पत्ति में देवी का नाम (सच्चियाय माता बनाम भाटियाणी माता) व पूर्वज का नाम (वैरसी बनाम वीरम)
  • ग्रंथ का सटीक नाम व वर्तनी ("हडबू का हाल" बनाम "हरभू का हाल")
  • जन्म वर्ष (वि.सं. 1448) — कुछ स्रोतों में स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता, अतः यह तिथि सांकेतिक मानें

🔷 लेखक परिचय (E-E-A-T Author Block)

लेखक: योगेश जांगिड़ (Yogesh Jangir) — सॉफ्टवेयर इंजीनियर एवं संस्थापक, Suyog Academy। राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC, RAS, RSMSSB, पटवारी, ग्राम सेवक, REET, SI) के लिए निःशुल्क हिंदी अध्ययन सामग्री तैयार करने में विशेषज्ञता।

सह-लेखक/समीक्षक: सुधीर ढाका, महेंद्र ढाका

संपादकीय नीति: सभी तथ्यों को प्रकाशन से पूर्व कई स्रोतों से सत्यापित किया जाता है; विवादित आंकड़ों को स्पष्ट रूप से "सत्यापन सलाह" में चिह्नित किया जाता है।

अंतिम संशोधन (Last Updated): 14 सितंबर 2026
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Sudhir Sirइतिहास विशेषज्ञलेखक परिचय
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. हड़बूजी सांखला का जन्म स्थान कौन-सा है?

Q2. हड़बूजी का मुख्य मंदिर किस गाँव में स्थित है?

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Q3. हड़बूजी के गुरु कौन थे?

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Q4. राजस्थान में किस लोकदेवता की पूजा "गाड़ी" के प्रतीक रूप में की जाती है?

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Q5. हड़बूजी किस मारवाड़ शासक के समकालीन माने जाते हैं?

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Q6. बेंगटी स्थित हड़बूजी मंदिर का निर्माण किसने करवाया?

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Q7. हड़बूजी सांखला किस लोकदेवता के मौसेरे भाई थे?

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Q8. हड़बूजी का मेला किस तिथि को आयोजित होता है?

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Q9. "सांखला" गोत्र वंश किस राजपूत वंश की शाखा है?

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Q10. हड़बूजी बेंगटी मंदिर वर्तमान में किस जिले में स्थित है?

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

हड़बूजी सांखला मारवाड़ क्षेत्र के एक प्रसिद्ध लोकदेवता व संत थे, जिन्हें शकुनशास्त्र के ज्ञाता और भविष्यदृष्टा के रूप में पूजा जाता है। वे राजस्थान के पंच पीर में सम्मिलित हैं।

इनका मुख्य पूजा स्थल बेंगटी गाँव, फलौदी में है, जिसका निर्माण महाराजा अजीतसिंह ने सन् 1721 ई. में करवाया था।

हड़बूजी बाबा रामदेवजी के मौसेरे भाई थे। रामदेवजी की प्रेरणा से ही उन्होंने योगी बालीनाथ से दीक्षा ली और अस्त्र-शस्त्र त्याग दिए।

हड़बूजी राजस्थान के एकमात्र लोकदेवता हैं जिनकी पूजा "गाड़ी" (लकड़ी की बैलगाड़ी) के प्रतीक रूप में की जाती है।

प्रतिवर्ष भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी को बेंगटी में हड़बूजी का मेला आयोजित होता है।

नहीं, ये दोनों अलग-अलग लोकदेवता हैं। तेजाजी परबतसर (डीडवाना-कुचामन) से संबंधित हैं जबकि हड़बूजी भूंडेल (नागौर) में जन्मे और बेंगटी (फलौदी) उनकी कर्मभूमि है।

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