राजस्थान के संभागों का गठन एवं पुनर्गठन: 1949 से वर्तमान तक
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स्रोत आधार: RPSC RAS / RSMSSB CET पाठ्यक्रम — राजस्थान इतिहास इकाई। पाठ्यपुस्तक पृष्ठ यहाँ नहीं चिपकाए गए।

सुयोग AI गुरु
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राजस्थान के संभागों का गठन एवं पुनर्गठन राजस्थान सामान्य ज्ञान का ऐसा विषय है जिसमें इतिहास, प्रशासनिक व्यवस्था और वर्तमान राजस्थान के जिलों की जानकारी एक साथ जुड़ती है। प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल यह पूछना पर्याप्त नहीं है कि राजस्थान में वर्तमान में कितने संभाग हैं, बल्कि यह भी पूछा जा सकता है कि संभागीय व्यवस्था कब शुरू हुई, प्रारंभ में कितने संभाग बनाए गए, 1962 में इसे क्यों समाप्त किया गया, 1987 में इसे कब दोबारा शुरू किया गया, अजमेर और भरतपुर कब नए संभाग बने, 2023 में कौन-कौन से नए संभाग बनाए गए और 2024 में कौन-से संभाग समाप्त किए गए।
वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में राजस्थान के 7 संभाग और 41 जिले हैं। वर्तमान सात संभाग हैं: अजमेर, भरतपुर, बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर। राजस्थान सरकार के RISL के 2025 के दस्तावेज में इन सात संभागों के अंतर्गत आने वाले सभी 41 जिलों की सूची दी गई है।
इस विषय का सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा-ट्रैप यह है कि 2023 में राजस्थान में 10 संभाग थे, लेकिन 2024 के पुनर्गठन के बाद फिर से 7 संभाग रह गए। 2023 में बनाए गए बांसवाड़ा, पाली और सीकर संभागों को 2024 के पुनर्गठन में समाप्त कर दिया गया। इसलिए किसी प्रश्न में वर्ष दिया हो तो उत्तर उसी वर्ष की प्रशासनिक स्थिति के आधार पर देना चाहिए।
Quick Answer Box: एक नजर में
- संभागीय व्यवस्था की शुरुआत: 1949
- प्रारंभिक संभाग: 5
- प्रारंभिक 5 संभाग: जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा और उदयपुर
- संभागीय व्यवस्था समाप्त: 1962
- संभागीय व्यवस्था पुनः शुरू: 26 जनवरी 1987
- 1987 में नया संभाग: अजमेर, जिससे संख्या 6 हुई
- 2005 में नया संभाग: भरतपुर, जिससे संख्या 7 हुई
- 2023 में नए संभाग: बांसवाड़ा, पाली और सीकर
- 2023 में कुल: 10 संभाग
- 2024 में समाप्त: बांसवाड़ा, पाली और सीकर
- वर्तमान: 7 संभाग और 41 जिले
राजस्थान में संभाग क्या है?
संभाग राज्य और जिले के बीच की एक प्रशासनिक इकाई है। एक संभाग के अंतर्गत कई जिले आते हैं और संभागीय स्तर पर प्रशासनिक समन्वय के लिए संभागीय आयुक्त महत्वपूर्ण अधिकारी होता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य एक बड़े राज्य को प्रशासनिक रूप से ऐसे क्षेत्रों में विभाजित करना है, जिनके माध्यम से अनेक जिलों की निगरानी और समन्वय अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सके।
राजस्थान जैसे क्षेत्रफल की दृष्टि से बड़े राज्य में संभागीय व्यवस्था का महत्व विशेष है। जिला स्तर पर कलेक्टर प्रशासन का प्रमुख अधिकारी होता है, जबकि संभागीय स्तर पर संभागीय आयुक्त कई जिलों से संबंधित प्रशासनिक कार्यों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसलिए परीक्षा में प्रशासनिक क्रम को सामान्य रूप से इस प्रकार समझा जा सकता है:
राज्य → संभाग → जिला → उपखण्ड → तहसील/उप-तहसील → ग्राम/स्थानीय इकाइयाँ
राजस्थान में संभागीय व्यवस्था की शुरुआत
राजस्थान में आधुनिक संभागीय प्रशासनिक व्यवस्था की शुरुआत 1949 में हुई। वृहद राजस्थान के गठन के बाद प्रशासन को व्यवस्थित करने के लिए संभागीय व्यवस्था विकसित की गई। प्रारंभिक व्यवस्था में 5 संभाग बनाए गए थे। ये थे:
- जयपुर संभाग
- जोधपुर संभाग
- बीकानेर संभाग
- कोटा संभाग
- उदयपुर संभाग
ऐतिहासिक प्रशासनिक विवरणों के अनुसार 15 अगस्त 1949 से पांच संभागीय आयुक्तों के माध्यम से नई संभागीय व्यवस्था को लागू किया गया और पांच क्षेत्रीय संभाग बनाए गए। उस समय संभागीय व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न पूर्व रियासती क्षेत्रों को एकीकृत प्रशासनिक ढांचे में व्यवस्थित करना था।
यह तथ्य राजस्थान के एकीकरण से सीधे जुड़ा हुआ है। 1948-49 में विभिन्न रियासतों के एकीकरण के बाद केवल राजनीतिक एकीकरण पर्याप्त नहीं था। अलग-अलग रियासतों की प्रशासनिक परंपराएं, राजस्व व्यवस्था और क्षेत्रीय सीमाएं अलग थीं। इसलिए नए राज्य के लिए जिला और संभाग स्तर पर प्रशासनिक ढांचे को व्यवस्थित करना आवश्यक था।
1949 में बने प्रारंभिक 5 संभाग
| क्रम | संभाग | ऐतिहासिक स्थिति |
|---|---|---|
| 1 | जयपुर | प्रारंभिक 5 संभागों में शामिल |
| 2 | जोधपुर | प्रारंभिक 5 संभागों में शामिल |
| 3 | बीकानेर | प्रारंभिक 5 संभागों में शामिल |
| 4 | कोटा | प्रारंभिक 5 संभागों में शामिल |
| 5 | उदयपुर | प्रारंभिक 5 संभागों में शामिल |
Exam Point: प्रारंभिक पांच संभागों में अजमेर और भरतपुर शामिल नहीं थे। अजमेर बाद में 1987 में छठा संभाग बना और भरतपुर 2005 में सातवां संभाग बना।
राजस्थान के एकीकरण और संभागीय व्यवस्था का संबंध
राजस्थान के संभागों को समझने के लिए राजस्थान के एकीकरण की पृष्ठभूमि को समझना उपयोगी है। राजस्थान का वर्तमान प्रशासनिक स्वरूप एक ही दिन में नहीं बना था। 1948 से 1956 के बीच राजस्थान के एकीकरण के कई चरण हुए। 30 मार्च 1949 को वृहद राजस्थान का गठन हुआ और 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन के बाद राजस्थान का पुनर्गठित स्वरूप सामने आया।
इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए Suyog Academy का राजस्थान एकीकरण Timeline 1948–1956 और राजस्थान एकीकरण के 7 चरण वाला नोट उपयोगी है।
इसी प्रकार राजस्थान का प्रशासनिक पुनर्गठन: 1949 से वर्तमान तक लेख में जिले और संभाग से जुड़े व्यापक प्रशासनिक परिवर्तनों को एक साथ समझाया गया है।
1962 में संभागीय व्यवस्था का समाप्त होना
राजस्थान में संभागीय व्यवस्था हमेशा लगातार लागू नहीं रही। 1962 में संभागीय व्यवस्था समाप्त कर दी गई। इस अवधि के बाद राज्य और जिले के बीच पहले जैसी संभागीय प्रशासनिक परत नहीं रही। उपलब्ध स्रोत इस समाप्ति को 1962 से जोड़ते हैं, हालांकि अलग-अलग संदर्भों में समाप्ति की सटीक तिथि अलग तरह से दी गई है। इसलिए परीक्षा में यदि केवल वर्ष पूछा जाए तो 1962 याद रखना सुरक्षित तथ्य है।
इस बदलाव का अर्थ यह नहीं था कि जिलों का प्रशासन समाप्त हो गया। जिला प्रशासन अपनी जगह कार्य करता रहा, लेकिन संभागीय स्तर की व्यवस्था को हटा दिया गया था। बाद में प्रशासनिक जरूरतों के कारण इसे पुनः स्थापित किया गया।
1987 में संभागीय व्यवस्था की पुनः शुरुआत
26 जनवरी 1987 को राजस्थान में संभागीय व्यवस्था पुनः शुरू की गई। इस पुनर्गठन में अजमेर को नया संभाग बनाया गया और कुल संभागों की संख्या 6 हो गई। उपलब्ध प्रशासनिक स्रोत भी 1987 में संभागीय व्यवस्था की पुनः शुरुआत और अजमेर के छठे संभाग बनने की पुष्टि करते हैं।
इसलिए परीक्षा के लिए यह क्रम बहुत महत्वपूर्ण है:
1949 → 5 संभाग → 1962 में समाप्त → 1987 में पुनः शुरुआत → अजमेर छठा संभाग
1987 में अजमेर संभाग क्यों महत्वपूर्ण है?
अजमेर को छठे संभाग के रूप में शामिल किए जाने से राजस्थान की संभागीय व्यवस्था में एक नया क्षेत्रीय प्रशासनिक केंद्र जुड़ा। बाद के दशकों में जिला पुनर्गठन और नए जिलों के गठन के साथ अजमेर संभाग की सीमा में भी परिवर्तन हुए। वर्तमान व्यवस्था में अजमेर संभाग में अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन, नागौर और टोंक जिले आते हैं।
2005 में भरतपुर संभाग का गठन
4 जून 2005 को भरतपुर को राजस्थान का सातवां संभाग बनाया गया। इसके साथ राज्य में संभागों की संख्या 7 हो गई। यह व्यवस्था 2023 में तीन नए संभाग बनने तक लागू रही।
भरतपुर संभाग का गठन राजस्थान के पूर्वी क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था को अलग संभागीय स्तर देने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव था। वर्तमान में भरतपुर संभाग में भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली और सवाई माधोपुर जिले शामिल हैं।
ध्यान रखें कि डीग वर्तमान 41-जिला व्यवस्था का हिस्सा है। 2023 में बना डीग जिला 2024 में समाप्त किए गए नौ जिलों में शामिल नहीं था। इसलिए वर्तमान भरतपुर संभाग की सूची में डीग को शामिल करना जरूरी है।
2023 का बड़ा संभागीय विस्तार: 7 से 10 संभाग
राजस्थान में 2023 में प्रशासनिक पुनर्गठन का बड़ा दौर आया। नए जिलों के साथ तीन नए संभाग भी बनाए गए। ये तीन संभाग थे:
- बांसवाड़ा संभाग
- पाली संभाग
- सीकर संभाग
इन तीन नए संभागों के बनने के बाद राजस्थान में कुल 10 संभाग हो गए। 2023 की इस व्यवस्था को वर्तमान व्यवस्था के साथ नहीं मिलाना चाहिए। Suyog Academy के प्रशासनिक पुनर्गठन नोट में भी 2023 में 3 नए संभाग बनने और कुल संख्या 10 होने का उल्लेख है।
| नया संभाग | 2023 में स्थिति | 2024 के बाद स्थिति |
|---|---|---|
| बांसवाड़ा | नया संभाग | समाप्त |
| पाली | नया संभाग | समाप्त |
| सीकर | नया संभाग | समाप्त |
2023 में 10 संभागों की व्यवस्था
2023 के पुनर्गठन के बाद सात पुराने संभागों के साथ तीन नए संभाग जुड़े। इस प्रकार अस्थायी रूप से राज्य में 10 संभाग थे:
- अजमेर
- भरतपुर
- बीकानेर
- जयपुर
- जोधपुर
- कोटा
- उदयपुर
- बांसवाड़ा
- पाली
- सीकर
यहां अस्थायी रूप से शब्द महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2024 के प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद तीन नए संभाग समाप्त कर दिए गए।
2024 का पुनर्गठन: 10 से फिर 7 संभाग
2024 में राज्य सरकार ने 2023 में बनाए गए नए जिलों और संभागों की समीक्षा की। 2024 के पुनर्गठन में बांसवाड़ा, पाली और सीकर संभाग समाप्त कर दिए गए। इसके बाद राजस्थान में फिर से 7 संभाग रह गए।
राजस्थान सरकार के RISL द्वारा प्रकाशित 2025 के e-Mitra दस्तावेज में राज्य को 41 जिलों और 7 संभागों में विभाजित बताया गया है। इसमें सातों संभागों के अंतर्गत आने वाले 41 जिलों की सूची भी दी गई है।
इसलिए वर्तमान परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण संख्या है:
41 जिले + 7 संभाग
वर्तमान राजस्थान के 7 संभाग और उनके जिले
2025 में उपलब्ध राजस्थान सरकार के RISL दस्तावेज के अनुसार वर्तमान 7 संभागों के अंतर्गत जिलों का वितरण इस प्रकार है।
| क्रम | संभाग | वर्तमान जिले | जिलों की संख्या |
|---|---|---|---|
| 1 | अजमेर | अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन, नागौर, टोंक | 6 |
| 2 | भरतपुर | भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर | 5 |
| 3 | बीकानेर | बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर | 4 |
| 4 | जयपुर | अलवर, दौसा, जयपुर, झुंझुनूं, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, सीकर | 7 |
| 5 | जोधपुर | बालोतरा, बाड़मेर, जैसलमेर, जालोर, जोधपुर, पाली, फलोदी, सिरोही | 8 |
| 6 | कोटा | बारां, बूंदी, झालावाड़, कोटा | 4 |
| 7 | उदयपुर | बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, राजसमंद, सलूंबर, उदयपुर | 7 |
कुल = 6 + 5 + 4 + 7 + 8 + 4 + 7 = 41 जिले
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव: 2023 बनाम 2024
| आधार | 2023 | 2024 के बाद |
|---|---|---|
| कुल संभाग | 10 | 7 |
| नए संभाग | बांसवाड़ा, पाली, सीकर | ये तीनों समाप्त |
| सीकर | अलग संभाग | जयपुर संभाग |
| पाली | अलग संभाग | जोधपुर संभाग |
| बांसवाड़ा | अलग संभाग | उदयपुर संभाग |
2024 के बाद इन तीन क्षेत्रों का अपने पूर्ववर्ती संभागीय ढांचे में वापस समायोजन हुआ। वर्तमान सरकारी सूची में सीकर जयपुर संभाग, पाली जोधपुर संभाग और बांसवाड़ा उदयपुर संभाग में है।
राजस्थान के संभागों का गठन एवं पुनर्गठन: Timeline
| वर्ष/तिथि | घटना | परीक्षा के लिए मुख्य तथ्य |
|---|---|---|
| 1949 | संभागीय व्यवस्था की शुरुआत | प्रारंभिक 5 संभाग |
| 1949 | प्रारंभिक संभागीय ढांचा | जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर |
| 1962 | संभागीय व्यवस्था समाप्त | राज्य में संभागीय प्रणाली समाप्त हुई |
| 26 जनवरी 1987 | संभागीय व्यवस्था पुनः शुरू | अजमेर छठा संभाग बना |
| 4 जून 2005 | भरतपुर संभाग का गठन | कुल 7 संभाग |
| 2023 | तीन नए संभाग | बांसवाड़ा, पाली, सीकर; कुल 10 |
| दिसंबर 2024 | पुनर्गठन | तीन नए संभाग समाप्त |
| वर्तमान | प्रशासनिक स्थिति | 7 संभाग, 41 जिले |
संभागों के पुनर्गठन की जरूरत क्यों पड़ती है?
संभागीय सीमाएं स्थायी नहीं होतीं। राज्य में जिले बढ़ने, प्रशासनिक क्षेत्रफल बदलने, नई जिला इकाइयों के गठन या प्रशासनिक सुविधा की आवश्यकता के कारण संभागीय सीमाओं में परिवर्तन किया जा सकता है।
बड़े क्षेत्रफल वाले राज्य में यदि एक संभाग के अंतर्गत बहुत अधिक जिले हों तो प्रशासनिक निगरानी और समन्वय अधिक कठिन हो सकता है। इसके विपरीत छोटे क्षेत्रीय समूहों को अलग प्रशासनिक केंद्र देने से कुछ मामलों में प्रशासनिक पहुंच बढ़ सकती है। इसी प्रकार यदि नए जिले बनते हैं तो उन्हें किसी मौजूदा संभाग में शामिल किया जा सकता है या आवश्यकता होने पर नया संभाग बनाया जा सकता है।
राजस्थान में 2023 का उदाहरण नए संभागों के निर्माण का है, जबकि 2024 का उदाहरण प्रशासनिक समीक्षा के बाद कुछ संभागों को समाप्त करने का है। इसलिए संभागीय पुनर्गठन को एक स्थायी ऐतिहासिक घटना के बजाय प्रशासनिक संरचना के बदलते स्वरूप के रूप में समझना चाहिए।
राजस्थान के वर्तमान 7 संभाग याद करने की ट्रिक
वर्तमान सात संभागों को याद रखने के लिए नामों को क्षेत्रीय क्रम में पढ़ सकते हैं:
अजमेर → भरतपुर → बीकानेर → जयपुर → जोधपुर → कोटा → उदयपुर
एक और महत्वपूर्ण तरीका है सात संभागों को उनके प्रमुख क्षेत्रीय केंद्रों के साथ याद करना:
- अजमेर: मध्य-पूर्वी राजस्थान का प्रमुख प्रशासनिक क्षेत्र
- भरतपुर: पूर्वी राजस्थान
- बीकानेर: उत्तर-पश्चिमी राजस्थान
- जयपुर: पूर्वी-मध्य राजस्थान
- जोधपुर: पश्चिमी राजस्थान
- कोटा: दक्षिण-पूर्वी राजस्थान
- उदयपुर: दक्षिणी राजस्थान
वर्तमान संभागों में जिलों की संख्या
| संभाग | जिले | संख्या |
|---|---|---|
| अजमेर | 6 | 6 |
| भरतपुर | 5 | 5 |
| बीकानेर | 4 | 4 |
| जयपुर | 7 | 7 |
| जोधपुर | 8 | 8 |
| कोटा | 4 | 4 |
| उदयपुर | 7 | 7 |
| कुल | 41 जिले | 41 |
वर्तमान वितरण में जोधपुर संभाग में 8 जिले हैं, जबकि बीकानेर और कोटा संभाग में 4-4 जिले हैं। यह सूची राजस्थान सरकार के RISL दस्तावेज में दी गई 41-जिला और 7-संभाग व्यवस्था से मेल खाती है।
राजस्थान के संभाग और जिलों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण नोट्स
यदि आप प्रशासनिक भूगोल को व्यापक रूप से पढ़ रहे हैं, तो केवल संभागों की सूची याद करना पर्याप्त नहीं है। नए जिलों के गठन, 2023 के प्रशासनिक विस्तार और 2024 के पुनर्गठन को साथ पढ़ना अधिक उपयोगी रहेगा।
राजस्थान के 41 जिले व 7 संभाग GK में वर्तमान जिला-वार संरचना को एक साथ पढ़ सकते हैं।
राजस्थान के प्रशासनिक इतिहास के लिए राजस्थान का प्रशासनिक पुनर्गठन: 1949 से वर्तमान तक देखें। यह लेख संभागों के साथ जिलों के गठन और पुनर्गठन को भी जोड़ता है।
राजस्थान के एकीकरण की पृष्ठभूमि के लिए राजस्थान एकीकरण के 7 चरण और 1948–1956 राजस्थान एकीकरण Timeline पढ़ना उपयोगी है।
परीक्षा में इस टॉपिक का Syllabus Weight कैसे समझें?
राजस्थान के संभागों का अलग से निश्चित प्रश्न-वेटेज हर परीक्षा में निर्धारित नहीं होता। इसका महत्व सामान्यतः राजस्थान सामान्य ज्ञान, राजस्थान भूगोल, राजस्थान प्रशासन और समसामयिक प्रशासनिक परिवर्तन से जुड़े हिस्सों में आता है। इसलिए इसे एक स्वतंत्र तथ्य की तरह रटने के बजाय जिला पुनर्गठन, राजस्थान का प्रशासनिक पुनर्गठन और वर्तमान राजस्थान के मानचित्र के साथ पढ़ना बेहतर है।
| परीक्षा उपयोग | इस टॉपिक में क्या पढ़ें? | प्राथमिकता |
|---|---|---|
| RAS/RPSC | इतिहास + प्रशासन + वर्तमान 41 जिले/7 संभाग | उच्च |
| CET | वर्तमान संभाग, जिले और प्रमुख पुनर्गठन वर्ष | उच्च |
| पटवारी | जिला-वार और संभाग-वार संरचना | उच्च |
| VDO | राजस्थान प्रशासनिक भूगोल और वर्तमान इकाइयां | उच्च |
| REET/अन्य राजस्थान GK | मुख्य तथ्य और वर्तमान प्रशासनिक संख्या | मध्यम से उच्च |
Exam Trap: इन गलतियों से बचें
Exam Trap 1: वर्तमान में 10 संभाग हैं
गलत। 2023 में 10 संभाग हुए थे। 2024 के पुनर्गठन के बाद तीन नए संभाग समाप्त किए गए और वर्तमान व्यवस्था में 7 संभाग हैं।
Exam Trap 2: बांसवाड़ा वर्तमान में अलग संभाग है
गलत। वर्तमान व्यवस्था में बांसवाड़ा उदयपुर संभाग का हिस्सा है।
Exam Trap 3: पाली वर्तमान में अलग संभाग है
गलत। वर्तमान व्यवस्था में पाली जोधपुर संभाग के अंतर्गत है।
Exam Trap 4: सीकर वर्तमान में अलग संभाग है
गलत। वर्तमान व्यवस्था में सीकर जयपुर संभाग में है।
Exam Trap 5: राजस्थान में संभागीय व्यवस्था 1987 में पहली बार शुरू हुई
गलत। संभागीय व्यवस्था की शुरुआत 1949 में हुई थी। 1987 में इसे दोबारा शुरू किया गया।
Exam Trap 6: अजमेर प्रारंभिक पांच संभागों में था
गलत। प्रारंभिक पांच संभाग जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा और उदयपुर थे। अजमेर 1987 में छठा संभाग बना।
Exam Trap 7: भरतपुर 1987 में छठा संभाग बना
गलत। 1987 में अजमेर छठा संभाग बना था। भरतपुर 2005 में सातवां संभाग बना।
Exam Trap 8: 2023 में केवल जिले बढ़े थे
गलत। 2023 में नए जिलों के साथ तीन नए संभाग भी बनाए गए थे।
Exam Trap 9: वर्तमान जिले और पुराने जिले की सूची को मिलाना
2023 और 2024 के बाद प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव हुए। इसलिए किसी पुराने प्रश्न या पुस्तक में दी गई जिला-संभाग सूची को बिना वर्ष देखे वर्तमान उत्तर न मानें।
Exam Trap 10: 41 जिलों को 10 संभागों में बांटना
गलत। वर्तमान 41 जिले 7 संभागों में विभाजित हैं। 10 संभाग वाली स्थिति 2023 से 2024 के पुनर्गठन तक की अवधि से संबंधित है।
राजस्थान संभागीय व्यवस्था को 5 लाइनों में याद करें
- 1949: 5 संभागों से संभागीय व्यवस्था शुरू हुई।
- 1962: संभागीय व्यवस्था समाप्त हुई।
- 1987: व्यवस्था फिर शुरू हुई और अजमेर छठा संभाग बना।
- 2005: भरतपुर सातवां संभाग बना।
- 2023–2024: 10 संभाग हुए, फिर बांसवाड़ा, पाली और सीकर समाप्त होने के बाद 7 संभाग रह गए।
एक नजर में: 1949 से वर्तमान तक पूरा परिवर्तन
| अवधि | संभागों की संख्या | मुख्य बात |
|---|---|---|
| 1949–1962 | 5 | प्रारंभिक संभागीय व्यवस्था |
| 1962–1987 | संभागीय व्यवस्था नहीं | व्यवस्था समाप्त |
| 1987–2005 | 6 | अजमेर जुड़ा |
| 2005–2023 | 7 | भरतपुर जुड़ा |
| 2023–2024 | 10 | बांसवाड़ा, पाली, सीकर नए संभाग |
| 2024–वर्तमान | 7 | तीन नए संभाग समाप्त |
वर्तमान राजस्थान के 7 संभाग: त्वरित रिवीजन
| संभाग | जिले |
|---|---|
| अजमेर | अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन, नागौर, टोंक |
| भरतपुर | भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर |
| बीकानेर | बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर |
| जयपुर | अलवर, दौसा, जयपुर, झुंझुनूं, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, सीकर |
| जोधपुर | बालोतरा, बाड़मेर, जैसलमेर, जालोर, जोधपुर, पाली, फलोदी, सिरोही |
| कोटा | बारां, बूंदी, झालावाड़, कोटा |
| उदयपुर | बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, राजसमंद, सलूंबर, उदयपुर |
यह वर्तमान सूची 2025 के राजस्थान सरकार/RISL दस्तावेज से सत्यापित है।
इस टॉपिक से संभावित प्रश्न किस प्रकार बनते हैं?
संभागों पर प्रश्न सामान्यतः चार प्रकार से पूछे जा सकते हैं: गठन का वर्ष, समाप्ति और पुनः शुरुआत, नए संभागों का गठन, तथा वर्तमान जिले-वार वितरण। उदाहरण के लिए प्रश्न हो सकता है कि 1987 में कौन-सा संभाग बना, 2005 में कौन-सा संभाग सातवां बना, 2023 में कौन-से तीन नए संभाग बनाए गए, या वर्तमान में सीकर किस संभाग में है।
एक अन्य महत्वपूर्ण प्रकार का प्रश्न statement based हो सकता है। जैसे:
- 1949 में पांच संभाग बनाए गए थे।
- 1962 में संभागीय व्यवस्था समाप्त हुई थी।
- 1987 में अजमेर छठा संभाग बना था।
- 2005 में भरतपुर सातवां संभाग बना था।
- 2023 में तीन नए संभाग बनाए गए थे।
- 2024 के बाद वर्तमान में सात संभाग हैं।
ऐसे प्रश्नों में एक कथन सही और दूसरा गलत देकर विकल्प बनाए जा सकते हैं। इसलिए केवल संख्या याद करने के बजाय पूरी timeline याद करें।
Quiz और टेस्ट अभ्यास
इस नोट को पढ़ने के बाद राजस्थान GK के प्रशासनिक और भूगोल संबंधी MCQ का अभ्यास करें। Suyog Academy की ऑनलाइन टेस्ट सीरीज़ में राजस्थान भूगोल और राजस्थान GK से संबंधित विषयवार अभ्यास उपलब्ध है।
विशेष रूप से राजस्थान भूगोल के अभ्यास के लिए RAS Prelims 2026 टेस्ट सीरीज़ में राजस्थान भूगोल का विषयवार अभ्यास भी उपलब्ध है।
निष्कर्ष
राजस्थान के संभागों का इतिहास राज्य के प्रशासनिक विकास से जुड़ा हुआ है। 1949 में 5 संभागों से शुरू हुई व्यवस्था को 1962 में समाप्त किया गया। 1987 में इसे दोबारा शुरू किया गया और अजमेर को छठे संभाग के रूप में जोड़ा गया। 2005 में भरतपुर के गठन के बाद संभागों की संख्या 7 हुई।
2023 में प्रशासनिक पुनर्गठन के दौरान बांसवाड़ा, पाली और सीकर तीन नए संभाग बनाए गए और कुल संख्या 10 हो गई। इसके बाद 2024 के पुनर्गठन में इन तीनों संभागों को समाप्त कर दिया गया। वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में राजस्थान के 7 संभाग और 41 जिले हैं।
परीक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 2023 की 10-संभाग व्यवस्था और वर्तमान 7-संभाग व्यवस्था को अलग-अलग याद रखें। वर्तमान में सीकर जयपुर, पाली जोधपुर और बांसवाड़ा उदयपुर संभाग में हैं। यही 2023–2024 के पुनर्गठन का सबसे महत्वपूर्ण तथ्यात्मक बदलाव है।

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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. राजस्थान में प्रारंभिक संभागीय व्यवस्था में कितने संभाग बनाए गए थे?
PYQ-style Practice 2026Q2. निम्न में से कौन-सा 1949 के प्रारंभिक पांच संभागों में शामिल था?
PYQ-style Practice 2026Q3. राजस्थान में संभागीय व्यवस्था किस वर्ष समाप्त की गई थी?
PYQ-style Practice 2026Q4. 26 जनवरी 1987 को राजस्थान में कौन-सा नया संभाग बना?
PYQ-style Practice 2026Q5. राजस्थान का सातवां संभाग कौन-सा बना था?
PYQ-style Practice 2026Q6. 2023 में राजस्थान में निम्न में से कौन-सा संभाग बनाया गया था?
PYQ-style Practice 2026Q7. 2023 में राजस्थान में कुल कितने संभाग हो गए थे?
PYQ-style Practice 2026Q8. 2024 के पुनर्गठन के बाद निम्न में से कौन-सा संभाग समाप्त किया गया?
PYQ-style Practice 2026Q9. वर्तमान व्यवस्था में सीकर किस संभाग के अंतर्गत आता है?
PYQ-style Practice 2026Q10. वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में राजस्थान में कितने संभाग हैं?
PYQ-style Practice 2026महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
राजस्थान में आधुनिक संभागीय प्रशासनिक व्यवस्था 1949 में शुरू हुई थी। प्रारंभ में 5 संभाग बनाए गए थे।
1949 में राजस्थान में 5 संभाग बनाए गए थे। ये जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा और उदयपुर थे।
राजस्थान में संभागीय व्यवस्था 1962 में समाप्त की गई थी।
राजस्थान में संभागीय व्यवस्था 26 जनवरी 1987 को दोबारा शुरू की गई थी।
1987 में अजमेर को राजस्थान का छठा संभाग बनाया गया था।
भरतपुर को 4 जून 2005 को राजस्थान का सातवां संभाग बनाया गया था।
2023 में बांसवाड़ा, पाली और सीकर तीन नए संभाग बनाए गए थे।
2023 में तीन नए संभाग बनने के बाद राजस्थान में कुल 10 संभाग हो गए थे।
2024 के पुनर्गठन में बांसवाड़ा, पाली और सीकर संभाग समाप्त किए गए।
वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में राजस्थान में 7 संभाग और 41 जिले हैं। वर्तमान सात संभाग अजमेर, भरतपुर, बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर हैं।
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